लोगो के बारे में तो सभी जानते ही होंगे। अगले पांच वर्षो मे लोगोका रूप बदलने वाला है। भारतमें ईस वक्त 3D लोगो, जेली ईफेक्ट लोगो का चलन है। हाला की इस प्रकार के लोगो कोम्युटर या टीवी स्कीन पर देख्नने पर ही अच्छे लगते है। जब की लोगो प्रींट मिडियामें ही ज़्यादा उपयोग में आता है । (विझेटींग कार्ड, बेनर, पोस्टर, न्युझ पेपर एड ईत्यादि ) और वहां ऐसे लोगो का प्रभाव बहुत कम हो जाता है।
ग्राफिक डिझाईन, लोगो डिझाईन, पोस्टर, बेनर आदि के नाम सुनने पर ही कोम्युटर दिमाग़में आ जाता है। जब की १८वीं सदी से ही ग्राफिक डिझाईन युरोपके देशोमें शुरू हो गया था। प्राचीन मिस्र में भी ईनके नमुने पाए गए है! जहां तक भारत की बात है यहां बहुत देर के बाद लोगो, ग्राफिक डिझाईन की महत्ता नज़्रर आई।
दुनिया के बेस्ट लोगो, डिझाईन पहेले हाथ से ही तैयार होतें है।
लोगो आपके बिझनेस एवं पर्स्नालिटी को दिखाता है। देखनेवालों के मनमें वह आपके बिझनेसकी एक छबी सी बना देता है। ओर कंपनी से आपकी कंपनी को अलग दिखाता है। लेकिन आपको जान कर आश्चर्यं होगा की लोगो आपके लिये है ही नहि! लोगो आपकी टार्गेट कस्टमर के लिए होता है।
लोगो में यह बातें बेहद जरूरी है।
सिम्पलीसीटी
लोगो एकदम सिम्पल होना चाहिए। ताकि पहली ही नज़्रर मे लोगो का कोन्सेप्ट, मेसेज डिलिवर हो जाए।
रिकॉल वेल्यु
सिम्पलीसीटी की वज़ह से लोगो की रीकॉल वेल्यु बढ़ जाती है।
युनिक और ओरिजनल
लोगो युनिक तो होना ही है। जैसे आप कीसी ओर के उतारे हुए कपडे नहिं पहेनते, वैसे ही आप चाहोगे की आपका लोगो सबसे अलग हो, युनिक हो। लेकिन कभी कभी ऐसा होता है की एक लोगो अंशतः किसी ओर लोगो जैसा दिखता है उसे झट से बदल देना चाहिए।

ग्राफिक डिझाईन, लोगो डिझाईन, पोस्टर, बेनर आदि के नाम सुनने पर ही कोम्युटर दिमाग़में आ जाता है। जब की १८वीं सदी से ही ग्राफिक डिझाईन युरोपके देशोमें शुरू हो गया था। प्राचीन मिस्र में भी ईनके नमुने पाए गए है! जहां तक भारत की बात है यहां बहुत देर के बाद लोगो, ग्राफिक डिझाईन की महत्ता नज़्रर आई।
दुनिया के बेस्ट लोगो, डिझाईन पहेले हाथ से ही तैयार होतें है।
लोगो आपके बिझनेस एवं पर्स्नालिटी को दिखाता है। देखनेवालों के मनमें वह आपके बिझनेसकी एक छबी सी बना देता है। ओर कंपनी से आपकी कंपनी को अलग दिखाता है। लेकिन आपको जान कर आश्चर्यं होगा की लोगो आपके लिये है ही नहि! लोगो आपकी टार्गेट कस्टमर के लिए होता है।
लोगो में यह बातें बेहद जरूरी है।
सिम्पलीसीटी
लोगो एकदम सिम्पल होना चाहिए। ताकि पहली ही नज़्रर मे लोगो का कोन्सेप्ट, मेसेज डिलिवर हो जाए।
रिकॉल वेल्यु
सिम्पलीसीटी की वज़ह से लोगो की रीकॉल वेल्यु बढ़ जाती है।
युनिक और ओरिजनल
लोगो युनिक तो होना ही है। जैसे आप कीसी ओर के उतारे हुए कपडे नहिं पहेनते, वैसे ही आप चाहोगे की आपका लोगो सबसे अलग हो, युनिक हो। लेकिन कभी कभी ऐसा होता है की एक लोगो अंशतः किसी ओर लोगो जैसा दिखता है उसे झट से बदल देना चाहिए।
Latest Logos
सबने 3D लोगो ट्राय कर लिए, कलरफुल लोगो बना लिए. अब और आगे बढ कर बहुत ही सिम्पल लोगो बन रहें है, जो ज्यादातर एक शेप ही बन गए है। शुरुआत ओलम्पिक 2012 के लोगो से हुई थी! या फिर विडिओकोनके नये लोगोने शुरुआत की। अब एयरटेल, हीरो मोटो कोर्प, वोडाफोन के लोगो बदल कर नए युगमें प्रवेश कर चुके है। आनेवाले सालोमें Shape Based लोगो का चलन फिर से चल पडेगा। फिरसे? जी हां नाईकी लोगो के समयकालमें तो इस प्रकार के लोगो युझ हो चुके थे! कुछ नया नहि है...इसका मतलब आप बेझीझक नए/एक्परीमेन्टल लोगो ट्राय कर सकतें है!







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